एक और जहा करकरे की शहादत पर राजनीति हो रही है भारत सरकार जांच को आगे न बढा कर अंतुले को आगे बढा रही है !पकिस्तान को दवाब मैं न लाकर खुद दवाब मैं आ रही है वहीँ मुनव्वर राणा लिखते है .....
ये इन्तखाब नहीं है तेरा तो किसका है...
ये हरजाब नहीं है तेरा तो किसका है...
क्यों अपने लोगो को पहचानता नहीं है तू...
अगर `कसाब` नहीं है तेरा तो किसका है ?
Tuesday, December 30, 2008
क्रांति के मायने..
``कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ की उथल-पुथल मच जाए``... ..,वीर रस की कविताएँ अब हास्य पैदा करती है, दिनकर का अंदाज अब निराला लगता है ! नारे,क्रांति,परिवर्तन ये सब घिसी-पिटी बातें लगती है !
दरअसल 1947 के बाद से ही देश का कोई न कोई हिस्सा, कोई न कोई तबका `यह आजादी झूठी है`या `यह लोकतंत्र फर्जी है` का नारा लगता आ रहा है लेकिन इन नारों की आड़ मैं हमेशा हुआ यह है की उन्हें लगाने वालों ने व्यवस्था में अपना हिस्सा बढाने या उसके साथ कोई नया समीकरण बैठाने की मांग की है और जैसे ही उनकी मांग पूरी हो जाती है वे यह मांग करना बंद कर देते है और आर्थिक-राजनितिक अवसरों की होड़ में लग जाते है !विद्यालय से लेकर विस्वविद्यालय तक की पढाई में हमारा परिचय जिस क्रान्ति शब्द से हुई है वह है-फ्रासीसी क्रांति,औधोगिक क्रांति, रूसी या कयूबाई क्रांति ! इन क्रांतियों के इतिहास के अध्ययन से हमारी सोच में क्रांति का मतलब रहा राजनितिक,सामाजिक,आर्थिक विसमताओ, शोषण आदि से मुक्ति के लिये सत्ता और व्यवस्था का आमूल चुल परिवर्तन करना!सब जानते है की इन क्रांतियों ने अपने-अपने मुल्क में लोकतंत्रीय शासन-व्यवस्था का निर्माण का मार्ग प्रसस्त किया है !
वर्तमान समाज में क्रांति का अर्थ अब स्त्री के देह से कपडे उतरने या असामाजिक होने से रह गया है..!
दरअसल 1947 के बाद से ही देश का कोई न कोई हिस्सा, कोई न कोई तबका `यह आजादी झूठी है`या `यह लोकतंत्र फर्जी है` का नारा लगता आ रहा है लेकिन इन नारों की आड़ मैं हमेशा हुआ यह है की उन्हें लगाने वालों ने व्यवस्था में अपना हिस्सा बढाने या उसके साथ कोई नया समीकरण बैठाने की मांग की है और जैसे ही उनकी मांग पूरी हो जाती है वे यह मांग करना बंद कर देते है और आर्थिक-राजनितिक अवसरों की होड़ में लग जाते है !विद्यालय से लेकर विस्वविद्यालय तक की पढाई में हमारा परिचय जिस क्रान्ति शब्द से हुई है वह है-फ्रासीसी क्रांति,औधोगिक क्रांति, रूसी या कयूबाई क्रांति ! इन क्रांतियों के इतिहास के अध्ययन से हमारी सोच में क्रांति का मतलब रहा राजनितिक,सामाजिक,आर्थिक विसमताओ, शोषण आदि से मुक्ति के लिये सत्ता और व्यवस्था का आमूल चुल परिवर्तन करना!सब जानते है की इन क्रांतियों ने अपने-अपने मुल्क में लोकतंत्रीय शासन-व्यवस्था का निर्माण का मार्ग प्रसस्त किया है !
वर्तमान समाज में क्रांति का अर्थ अब स्त्री के देह से कपडे उतरने या असामाजिक होने से रह गया है..!
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