एक और जहा करकरे की शहादत पर राजनीति हो रही है भारत सरकार जांच को आगे न बढा कर अंतुले को आगे बढा रही है !पकिस्तान को दवाब मैं न लाकर खुद दवाब मैं आ रही है वहीँ मुनव्वर राणा लिखते है .....
ये इन्तखाब नहीं है तेरा तो किसका है...
ये हरजाब नहीं है तेरा तो किसका है...
क्यों अपने लोगो को पहचानता नहीं है तू...
अगर `कसाब` नहीं है तेरा तो किसका है ?
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2 comments:
pkistaan hai hai
अम्मा
चिंतन दर्शन जीवन सर्जन
रूह नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर शराबा
सूनापन तनहाई अम्मा
उसने खुद़ को खोकर मुझमें
एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल
जैसी ही सच्चाई अम्मा
सारे रिश्ते- जेठ दुपहरी
गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर
भीनी-सी पुरवाई अम्मा
घर में झीने रिश्ते मैंने
लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती थी
जाने कब तुरपाई अम्मा
बाबू जी गुज़रे, आपस में-
सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-
मैं घर में सबसे छोटा था
मेरे हिस्से आई अम्मा
- आलोक श्रीवास्तव
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