Tuesday, December 30, 2008

कसाब नहीं है तेरा तो किसका है ?

एक और जहा करकरे की शहादत पर राजनीति हो रही है भारत सरकार जांच को आगे न बढा कर अंतुले को आगे बढा रही है !पकिस्तान को दवाब मैं न लाकर खुद दवाब मैं आ रही है वहीँ मुनव्वर राणा लिखते है .....
ये इन्तखाब नहीं है तेरा तो किसका है...
ये हरजाब नहीं है तेरा तो किसका है...
क्यों अपने लोगो को पहचानता नहीं है तू...
अगर `कसाब` नहीं है तेरा तो किसका है ?

2 comments:

aahsas said...

pkistaan hai hai

RAJESH KUMAR said...

अम्मा


चिंतन दर्शन जीवन सर्जन
रूह नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर शराबा
सूनापन तनहाई अम्मा

उसने खुद़ को खोकर मुझमें
एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल
जैसी ही सच्चाई अम्मा

सारे रिश्ते- जेठ दुपहरी
गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर
भीनी-सी पुरवाई अम्मा

घर में झीने रिश्ते मैंने
लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती थी
जाने कब तुरपाई अम्मा

बाबू जी गुज़रे, आपस में-
सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-
मैं घर में सबसे छोटा था
मेरे हिस्से आई अम्मा

- आलोक श्रीवास्तव